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गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

Rail budget 2016 by Ministry of railways Suresh Prabhu

JaiHoPrabhu! मोदी ने कहाः वादों पर खरा उतरा है रेल बजट 

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने गुरुवार को संसद में रेल बजट 2016 पेश किया। ये मोदी सरकार का तीसरा रेल बजट और प्रभु का दूसरा रेल बजट है। प्रभु ने बजट के दौरान न यात्री रेल किराया बढ़ाया और न मालभाड़े को बढ़ाया। साथ ही साथ उन्होंने यात्रियों की सुविधाओं का भी खास ख्याल रखा। बजट 2016 में इस बार चार नई ट्रेनों की घोषणा की गई है। जिनके नाम हमसफर, तेजस, उदय और अन्त्योदय हैं।



प्रभु ने कहानी सुनाकर बजट पेश करते हुए रेलवे को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने की बात कही। उन्होंने संसद में कहा कि हम न रुकेंगे, हम न झुकेंगे, चलो मिलकर कुछ नया बनाएं। इस रेल बजट में मुख्य तौर पर पांच चीजों पर जोर होगा। इनमें कस्टमर सर्विसेज, मालभाड़े से ज्यादा से ज्यादा कमाने, किराया में बिना बढ़ोतरी किए कमाई बढ़ाने, पारदर्शिता और रिफॉर्म शामिल हैं। वहीं प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी ने बजट की तारीफ करते हुए कहा कि यह बजट वादों पर खरा उतरा है।
सुरेश प्रभु के रेल बजट की अपडेट्स
- रेलवे किराये में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
- माल भाड़े में भी कोई इजाफा नहीं।
- चार नई ट्रेनों का ऐलान- हमसफर, तेजस, उदय और अन्त्योदय।
- देश का पहला रेल ऑटो हब चेन्नई में बनेगा।
- जापान की मदद से मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर काम।
- रेलवे की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराएंगे।
- खर्च में कटौती कर कमाई बढ़ा सकते हैं।
- 2020 तक रेलों को समय से चलाने का लक्ष्य।
- रेलवे में जीरो दुर्घटना का लक्ष्य।
- डिजिटल इंडिया मिशन के तहत इस साल ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम की शुरुआत की, जिसमें एसएमएस, ई-मेल के जरिए अलर्ट जारी हो रहे हैं।
- दुर्घटनाएं कम करने के लिए दुनिया के प्रमुख रेल संस्थानों, टेक्निकल रिसर्च इंस्टीट्यूट्स के साथ रिसर्च और विकास साझेदारी शुरू की।
- मौजूदा वर्ष में 820 रोड ओवर ब्रिज/अंडर ब्रिज को पूरा किया और 1,350 पर काम चल रहा है।
- 2015-16 में 350 चौकीदार वाली लेवल क्रॉसिंग बंद की और 1,000 बिना चौकीदार वाले लेवल क्रॉसिंग बंद की।
- कैबिनेट ने पीपीपी मॉडल पर 400 रेलवे स्टेशनों का पुर्नविकास करने का अनुमोदन दिया।
- प्रत्येक सवारी डिब्बे में वरिष्ठ नागरिक कोटे को 50% बढ़ा रहे हैं।
- रेलवे स्टेशनों पर युवा और कारोबारी यात्रियों के लिए वाई-फाई सेवा शुरू की।
- महिला सुरक्षा के लिए सवारी डिब्बों में मध्यम भाग को आरक्षित किया गया।
- गूगल की साझेदारी से इस साल 100 स्टेशनों और अगले 2 साल में 400 स्टेशनों पर वाई-फाई सेवाओं का प्रस्ताव।
- दिव्यांगों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग को सुविधाजनक बनाया।
- दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर की ऑनलाइन बुकिंग और सभी सवारी डिब्बे ब्रेल इनेबल्ड किए।
- वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए लोअर बर्थ का कोटा बढ़ाया।
- इस वित्तीय वर्ष के अंत तक ट्रेनों में 17,000 जैव शौचालय उपलब्ध कराए जाएंगे।
- दुनिया का पहला जैव निर्वात शौचालय भारतीय रेल ने तैयार किया और डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस में प्रयोग हो रहा है।
- 1780 ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीनें और 225 कैश-क्वाइन और स्मार्ट कार्ड चालित टिकट वेंडिंग मशीनें लगाई गई।
- सोशल मीडिया और आईवीआरएस प्रणाली के जरिए ग्राहकों से मिल रहा फीडबैक।
- आधुनिक साज-सज्जा वाले सवारी डिब्बों के साथ नई रेलगाड़ी महामना एक्सप्रेस शुरू की है।
- यात्रियों से इनपुट लेने के लिए रोजाना 1 लाख से ज्यादा फोन किए जाते हैं ।
- रेलवे स्टेशनों पर 2,500 वाटर वेंडिंग मशीनें लगाई गईं।
- 17000 बायो टॉयलेट, 475 स्टेशनों पर अतिरिक्त शौचालय।
- 400 नए स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा।
- जनरल बोगी में भी मोबाइल चार्ज करने की सुविधा।
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए हर ट्रेन में 120 सीटें।
- 17000 नई ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीनें।
- रेल सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग जरूरी।
- इस साल 44 नई परियोजनाएं शुरू होंगी।
- प्रति मिनट 7200 ई-टिकट देने का लक्ष्य।
- बड़े स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
- राज्य सरकारों के साथ 6 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए।
- संयुक्त उद्यम के लिए 17 राज्यों से सैद्धांतिक अनुमोदन मिला।
- कैबिनेट ने रेलवे को राज्य सरकारों के साथ संयुक्त उद्यम की अनुमति दी।
- कार्यप्रणाली में कुशलता के लिए आंतरिक लेखा प्रणाली का पुनर्गठन।
- हमने ये सुनिश्चित किया है कि परियोजनाएं 6-8 माह के अंदर स्वीकृत हो जाएं, पहले इसमें 2 साल से ज्यादा का वक्त लगता था।
- सभी प्रकार की खरीद ई-प्लेटफॉर्म पर की जा रही है।
- रेल मंत्री ने तीन ट्रेनें शुरु करने की घोषणा की जिनके नाम होंगे हमसफर, तेजस और उदय एक्सप्रेस।
- हमारा मिशन पूरे कामकाज में 100 प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
- त्रिपुरा की राजधानी अगरतला को बड़ी लाइन नेटवर्क पर लाया गया।
- 7 किमी प्रतिदिन की रफ्तार से बड़ी लाइन चालू करने में सफल।
- पिछले वर्ष की गई 139 घोषणाओं पर कार्रवाई आरंभ की गई।
- भारतीय जीवन बीमा निगम ने अनुकूल शर्तों पर 1.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश की सहमति दी।
- 2500 किमी अतिरिक्त बड़ी लाइन चालू करने के लक्ष्य से भी आगे निकल जाएंगे, जो पिछले साल से करीब 30त्न ज्यादा होगा।
- अगले वित्तीय वर्ष में 2,000 किमी का विद्युतीकरण करने का प्रस्ताव।
- 2020 तक मालगाडिय़ों को टाइम-टेबल के अनुसार चलाने का लक्ष्य।
- 2020 तक बिना चौकीदार वाली क्रॉसिंग को खत्म करने का लक्ष्य।
- 2020 तक 95 प्रतिशत तक समय पालन का लक्ष्य।
- वित्तीय वर्ष 2016-17 में पूंजीगत योजना के लिए 1.21 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं।
- हमारा निवेश पिछले वर्ष के औसत का लगभग दोगुना होगा।
- आगामी वित्तीय वर्ष में शून्य आधारित बजट प्रक्रिया की अवधारणा अपनाएंगे।
- अगले वर्ष तक 1,84,820 करोड़ रुपए का राजस्व जुटा सकेंगे।
- 2020 तक ट्रेनों से मल-मूत्र के सीधे डिस्चार्ज को समाप्त करने का लक्ष्य।
- 2020 तक स्वर्णिम चतुर्भुज पर सेमी हाईस्पीड ट्रेनें चलाने का लक्ष्य।
- 2020 तक मालगाडिय़ों की औसत गति 50 किमी/घंटे और मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की औसत गति 80 किमी/घंटे तक करने का लक्ष्य
- ये मेरा बजट नहीं बल्कि आम लोगों का बजट है।
- मैं रेल को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाना चाहता हूं।
- ये बजट देश की नई यात्रा और बदलाव का होगा।
- हम नए स्त्रोतों के जरिए राजस्व जुटाएंगे, हम अपनी क्षमता बढ़ाएंगे।
- नागरिकों को ऐसी रेल सेवा मुहैया कराना है, जिस पर वे गर्व कर सकें।
- रेलवे में 1 रुपए के निवेश से पूरी अर्थव्यवस्था में 5 रुपए की वृद्धि हो।
बजट पेश करने से पहले सुरेश प्रभु ने कहा कि रेल से लोगों की बहुत सी आशाएं हैं, हमारा बजट इन सभी बातों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। सबको पसंद आएगा ऐसी आशा करता हूं।

"Acchche din" comes for trains, no train air hikes

पटरी पर दौड़ी 'अच्छे दिनों' की ट्रेन, ना किराया बढ़ा, ना मालभाड़ा 

रेल मंत्री सुरेश प्रभु का दूसरा बजट आम जनता के लिए राहत भरा रहा। इस रेल बजट में प्रभु ने आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए रेल किराए में किसी भी तरह की बढ़ोत्तरी नहीं की है। इसके साथ ही माल भाड़ा भी नहीं बढ़ाया गया है। बजट से पूर्व जनता की सबसे बड़ी मांग यही थी कि किसी भी रूप में यात्री किराए में बढ़ोत्तर ना की जाए, ताकि रेल के सफर से उनकी जेब पर कोई असर नहीं पड़े और इस बजट में प्रभु वास्तव में जनता के लिए \'प्रभु\' बने और इनकी यात्री भाड़े में किसी भी तरह की बढ़ोत्तरी ना कर जनता को बड़ी राहत दी है।




किराया-मालभाड़ा नहीं बढ़ाने के पीछे का कारण जानें

अपने बजट भाषण के दौरान ने रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि अब तक भारतीय रेल ने राजस्व बढ़ाने के लिए किराया बढ़ाने पर ही विशेष जोर दिया है। हम इस बदलना चाहते हैं और परिवहन के क्षेत्र में हमारे हिस्से को दोबारा पाने के लिए हम मालभाड़ा नीतियों पर अपनी परंगरागत सोच को बदलना चाहते हैं। हम राजस्व के नए स्त्रोतों का दोहन करेंगे ताकि प्रत्येक दृश्य या अदृश्य परिसंपत्ति को अधिकाधिक भुनाया जा सके। रेल मंत्री ने कहा कि अधिकतम उत्पादका सुनिश्चित करने के लिए खर्च होने वाले एक-एक रुपए की फिर से जांच की जाएगी। हम आगमी वर्ष में वित्तीय दृष्टि से शून्य आधारित बजट प्रक्रिया की अवधारणा अपनाएंगे। हम अपने कार्यकुशलता के मानदंंडों और खरीद प्रक्रियाओं में सुधार करके उन्हें अंतराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के समकक्ष बनाएंगे। हम अपने प्रत्येक क्रिया कलाप को कुशलता से पूरा करेंगे और परिणाम भी प्राप्त करेंगे।


रेल मंत्रालय से सर्वे ने उड़ाए थे होश
आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले ही खबरें सामने आ रही थीं कि इस बार रेल बजट में यात्री किराए में दस प्रतिशत और माल भाड़े में पांच प्रतिशत किराया बढ़ाया जा सकता है। इसे लेकर रेल मंत्रालय ने किराया बढ़ाने को लेकर सर्वे भी कराया था। उस वक्त कहा जा रहा था कि बड़ा हुआ किराया चुनिंदा मार्गों पर ही बढ़ाया जा सकता है।


पिछली बार क्या हुआ था माल भाड़ा बढऩे के बाद
प्रभु ने अपने पिछले रेल बजट में मालभाडे में बढ़ोत्तरी करते हुए अनाज, दालों और यूरिया के ढुलाई भाड़े में रिकॉर्ड 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी थी।प्रभु ने बेहद शातिर तरीके से खाने वाले नमक की ढुलाई भाड़े में फेरबदल किया है, ताकि लोगों को लगे कि नमक की ढुलाई सस्ती होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दरअसल उन्होंने खाने वाले नमक की ढुलाई का क्लास तो 110 से घटा कर 100 कर दिया, लेकिन क्लास 100 के लिए माल भाड़े के ढांचे में 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है।
खाद्यान्न एवं दालों की ढुलाई में 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी से बाजार में गेहूं, मक्का से लेकर दाल तक महंगी हो गई। यही नहीं, यूरिया की ढुलाई में भी 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई थी। इसका सीधा असर खाने-पीने की वस्तुओं पर पढ़ा, क्योंकि जब किसानों को महंगा यूरिया मिलेगा तो साग-सब्जी से लेकर तमाम कृषि उत्पाद महंगे हो गए। कोयले की ढुलाई में 6.3 फीसदी की बढ़ोत्तरी भी गई।